Tuesday, October 20th, 2026

MSME: प्रभारियों के भरोसे जिले, बिगड़ती स्थिति के लिए ठहराया जिम्मेदार

भोपाल
प्रदेश में एमएसएमई के जरिये सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की प्लानिंग पर अमल के बीच अफसरों में खींचतान के चलते विवाद की स्थिति बनने लगी है। इसकी वजह विभाग में महाप्रबंधकों को हटाने और करीब पचास फीसदी जिलों में प्रभारी अफसरों की पदस्थापना को बताया जा रहा है। अधिकारियों का आरोप है कि जहां ज्यादा डेवलपमेंट के चांस हैं, उन प्रमुख जिलों में विभाग ने महाप्रबंधक स्तर के अफसरों की पदस्थापना के बजाय प्रभारियों को जिम्मेदार बना दिया है। मौजूदा समय में 23 जिलों में प्रभारियों को एमएसएमई की कमान सौंप दी गई है।

एमएसएमई में पिछले कुछ महीनों में वरिष्ठ प्रबंधकों को जिला व्यापार और उद्योग केंद्र के रिक्त महाप्रबंधकों का चार्ज देने का काम तेजी से किया जा रहा है। स्थिति तब बिगड़ने लगी जब कई जिलों में तीन साल की अवधि पूरी किए बगैर पदस्थ महाप्रबंधक स्तर के अफसरों को हटाकर वहां भी वरिष्ठ प्रबंधकों को प्रभारी महाप्रबंधक का जिम्मा सौंप दिया गया। इसमें मंत्रालय स्तर पर ओएसडी स्तर के अधिकारियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके द्वारा ऐसे हालात बनाए जा रहे। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में जिला व्यापार और उद्योग केंद्र भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, कटनी, रतलाम, रीवा, सतना, धार, गुना, मंडीदीप, मंडला, मंदसौर जैसे 23 बड़े जिले प्रभारियों के भरोसे हैं, वहीं डिंडोरी, बालाघाट, हरदा, नीमच, शिवपुरी, शहडोल जैसे पिछड़े जिलों में वरिष्ठ प्रबंधकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मालनपुर के महाप्रबंधक ने तो तबादले के विरोध में कोर्ट से स्टे भी ले लिया है।

सीएम शिवराज सिंह चौहान का फोकस प्रदेश में अधिक से अधिक उद्योग लगाने और हर माह एक लाख लोगों को उद्योग, सरकारी नौकरी और स्वरोजगार के जरिये रोजगार देने पर है। कल भी उन्होंने देवास में इस बात को दोहराया है। सूत्रों का कहना है कि प्रभारियों के सहारे जिलों की व्यवस्था संचालित करने के एमएसएमई विभाग के फैसले से इस पर असर पड़ना तय है क्योंकि विभाग में ताबड़तोड़ तबादलों से मची खींचतान को रोकने विभागीय आयुक्त और प्रमुख सचिव भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

विभागीय अफसरों के मुताबिक होशंगाबाद समेत कई जिलों में महाप्रबंधक नहीं होने से ऐसे जिलों की जनवरी माह की सैलरी भी अटक सकती है। अफसरों का विरोध इस बात को लेकर भी है कि तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के पहले अफसरों को इधर उधर करके विभागीय कामों को प्रभावित करने का काम किया जा रहा है।

 

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Source : Agency

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